जगदलपुर। बस्तर में अब न्यूरोलॉजी से जुड़ी समस्याओं का त्वरित हल हो पा रहा है। डिमरापाल स्थित कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पिटल (सीसीएसएच) में पदस्थ न्यूरोसर्जन डॉ. पवन बृज अब स्थानीय स्तर पर ही न्यूरोसर्जरी से जुड़े मामलों का उपचार कर रहे हैं। डॉ. पवन बृज ने एक 7 साल के बालक की सफल ब्रेन एब्सेस ड्रेनेज सर्जरी की है। फिलहाल बालक की हालत में लगातार सुधार आ रहा है।
बीते करीब 2 से 3 महीनों से कोड़ेनार का रहने वाला 7 साल का राजकुमार मौर्य तेज सिरदर्द से जूझ रहा था। इसके साथ ही उसे बुखार के साथ तेज झटके भी आ रहे थे। गुरुवार की देर शाम बालक के परिजन उसे गंभीर हालत में कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पिटल (सीसीएसएच) लेकर पहुंचे। यहां डॉ. पवन कुमार बृज ने बालक की हालत देखी और प्रारंभिक जांच में उसके सिर में मवाद भरे होने की जानकारी मिलते ही तत्काल बालक की सर्जरी करने का निर्णय लिया।
बालक की गंभीर हालात को देखते हुए उन्होंने रात में तत्काल ऑपरेशन की व्यवस्था करवाई। सर्जरी शुरू करने से पहले एनेस्थीसिस्ट डॉ. जागृति और डॉ. श्रीदेवी ने बालक को एनेस्थीसिया दिया, जिसके बाद डॉ. पवन बृज ने उसकी ब्रेन एब्सेस ड्रेनेज सर्जरी शुरू की। करीब डेढ़ घंटे तक चली सर्जरी के दौरान बालक के सिर से लगभग 40 मिलीलीटर मवाद निकाला गया। ऑपरेशन के बाद बालक को वार्ड में शिफ्ट कर उसे ऑब्जर्वेशन में रखा गया है, जहां बालक के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आ रहा है।
कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पिटल (सीसीएसएच) के न्यूरोसर्जन डॉ. पवन बृज ने बताया कि यदि बालक की तत्काल सर्जरी नहीं की जाती तो उसकी हालत और ज्यादा बिगड़ सकती थी, जिसके बाद उसे वेंटिलेटर पर रखने तक की नौबत आ जाती, इसीलिए तत्काल ऑपरेशन कर बच्चे की समस्या का उपचार किया गया। उन्होंने बताया कि बच्चे के कान से मवाद आने की समस्या थी, जिसके कारण उसका संक्रमण दिमाग तक फैल चुका था। ब्रेन एब्सेस ड्रेनेज सर्जरी के जरिये अब बालक का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है। ऑपरेशन के बाद से उसे अब तक न झटके आये हैं और न ही बुखार आया है। उम्मीद है, जल्दी ही उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
डॉ. पवन बृज ने कहा कि यदि किसी बच्चे के कान से मवाद आने की समस्या हो तो इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। तत्काल डॉक्टर से मिलकर इसका इलाज करवाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई बार लंबे समय से कान से मवाद आने की समस्या का इलाज बेहद आवश्यक है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो इससे मरीज की जान भी जा सकती है।

