ज्ञापन में सक्षम ने कहा कि मसीही समुदाय द्वारा आदिवासियों को दिग्भ्रमित करते हुए धर्मांतरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मनगढ़ंत संस्कृत मंत्र को अपनी प्रचार सामग्रियों में शामिल किया है। इसके साथ ही समुदाय विशेष के मुख्य अधिकारियों की फोटो और नाम भी अंकित किये गए हैं। उन्होंने कहा कि यह मंत्र या श्लोक किसी भी हिंदू धर्म के ग्रंथों में नहीं है, लेकिन ॐ और नम: हिन्दू ग्रंथों में पाए जाते हैं। ‘ॐ’ नाद ब्रह्म की व्याख्या करता है। यह हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रतीक है। इसलिए इसका उपयोग करना यह हर सनातनी व्यक्ति की धार्मिक भावना आहत करता है। उन्होंने बताया कि समुदाय विशेष के मुख्य ग्रंथ की मुख्य भाषा संस्कृत नहीं है तो यह मंत्र रुपी वाक्य का प्रयोजन किसलिए किया गया है, इसका उद्देश्य साफतौर पर परिलक्षित होता है कि आदिवासियों को दिग्भ्रमित कर धर्मांतरण का उद्देश्य साधना है। यदि इस मनगढ़ंत मंत्र का वास्तविक अर्थ निकाला जाए तो इसका अर्थ है कन्या के शुद्धिकरण को हम नमन करते है, होता है। संस्कृत के इस तरह के मनगढ़ंत मंत्र का अर्थ यही निकलता है कि बहुसंख्यक समाज के धर्म में कन्या शुद्ध या पवित्र नहीं हैं और यदि वे समुदाय विशेष का धर्म अपना लें तो वे शुद्ध हो जाएंगी। यह हिंदू समाज और धर्म का अपमान है और इसके जरिये आदिवासियों को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस पर पुलिस द्वारा धार्मिक भावना आहत करने और धोखाधड़ी करने के आरोप में समुदाय विशेष के लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग सक्षम ने की है। इस दौरान सुनील नत्थानी, शुभम गुप्ता, दिलेश जोशी, ओम साहू सहित अन्य मौजूद थे।
समुदाय विशेष ने संस्कृत के मनगढ़ंत मंत्र से धार्मिक भावना की आहत, सक्षम ने कार्रवाई करने पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन
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December 16, 2025

